Friday, June 3, 2011

संकट मोचक योजना-पाली

मातृ मृत्यु रोकने हेतु जिला प्रशासन एवं श्री शनिधाम ट्रस्ट प्रतिबद्ध
 पाली जिले में मातृ मृत्यु रोकने हेतु जिला प्रशासन तथा चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग बहुत गम्भीर हो चुका है तथा इस हेंतु अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की है। जिला कलक्टर श्री नीरज के पवन ने बताया कि पाली जिले में किसी भी हालत में मातृ मृत्यु नहीं होने दी जायेगी,इस हेतु कई प्रयास किये जा रहे हैं,इसी कड़ी में एक नई योजना का शुभारम्भ 30 मई 2011 से किया जा रहा है। नई योजना का नाम '' संकट मोचक योजना-पाली '' होगा । उन्होने बताया कि पाली जिले में श्री शनिधाम ट्रस्ट, आलावास के प्रणेता दाती महाराज मदन राजस्थानी के सहयोग से उक्त योजना पूरे जिले में लागु की जायेगी। श्री पवन ने बताया कि योजना के अनुसार पाली जिले में किसी भी विशिष्ठ चिकित्सा संस्थान पर गर्भवती महिला को गर्भावस्था, प्रसव के दौरान या प्रसव के डेढ माह तक की अवधि के दौरान आपातकालीन स्थिति में लेकर आने वाले व्यक्ति को अब पुरस्कार के रूप में नगद राशि प्रदान की जायेगी। चिकित्सा संस्थान के विशेषज्ञ चिकित्सक द्वारा यह प्रमाणित करने पर कि यदि ऐसी स्थिति में यदि महिला को चिकित्सा संस्थान में नही लाया जाता तो शायद महिला की मृत्यु हो सकती थी, लेकिन सही समय एवं सही चिकित्सा संस्थान पर लेकर आने पर महिला का सही समय पर उपचार हो सका है तथा महिला को बचाने में सहयोग मिला है। सम्भावित मातृ मृत्यु को रोकने में सहयोगी बनने वाले एसे प्रेरक व्यक्ति को श्री शनिधाम ट्रस्ट, आलावास की ओर से ग्यारह हजार रूपये की राशि पुरस्कार के रूप में प्रदान की जायेगी। योजना का एक मात्र उद्देश्य मातृ मृत्यु को रोकना है।
मातृ मृत्यु को रोकने हेतु चिकित्सा संस्थान पर महिला को लाने वाले व्यक्ति को इस हेतु आवेदन पत्र भरकर सम्बंधित चिकित्सा विशेषज्ञ से प्रमाणित करवा कर चिकित्सा संस्थान के प्रभारी चिकित्सक से प्रतिहस्ताक्षर करवा कर जिला स्तर पर प्रस्तुत करना होगा,जिसकी जांच मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा योजना के जिला नोडल अधिकारी करेगें तथा जिला कलक्टर द्वारा अनुमोदन करने पर श्री शनिधाम ट्रस्ट, आलावास द्वारा पुरस्कार राशि प्रदान की जायेगी। जिला कलक्टर ने बताया कि महिला को आपात स्थिति में चिकित्सा संस्थान तक ले जाने वाला व्यक्ति चिकित्सा विभाग का कोई भी कर्मचारी, आशा सहयोगिनी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, साथिन, गांव की दाई, कोई भी सरकारी कर्मचारी,जनप्रतिनिधी या गांव का कोई भी आम व्यक्ति हो सकता है। उसे यह सम्बंधित चिकित्सा विशेषज्ञ से निर्धारित प्रारूप में प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा कि यदि वह आज इस महिला को चिकित्सा विशेषज्ञ के पास लेकर नहीं आता तो हो सकता है महिला की मृत्यु हो जाती। इस अभिनव योजना के व्यापक प्रचार प्रसार के लिये जिला प्रशासन द्वारा विशेष प्रयास किये जायेगें ताकि जिले में एक भी मातृ मृत्यु नहीं हो । 

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